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संपादकीय

प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी का एलान करते हुए जनता से सिर्फ़ पचास दिन मांगते हुए गर्वोक्ति की थी-“अगर हालत न सुधरे तो जिस चौराहे पर चाहना, ज़िंदा जला देना।‘’ अब, जबकि आम चुनाव को एक साल से भी कम वक्‍त…

बेरोज़गारी की भयावह होती स्थिति

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ 2014 से लेकर 2016 के बीच दो सालों में देश के 26 हज़ार 500 युवाओं ने आत्महत्या की। 20 साल से लेकर 30-35 साल के युवा डिप्रेशन के शिकार हो जा रहे हैं, व्यवस्था नौजवानों को…

रफ़ाल डील से एचएएल के हटने और अंबानी के सटने का जवाब कौन देगा?

अविश्‍वास प्रस्‍ताव के दौरान संसद में प्रधान सेवक ने हमले की शुरुआत विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर ‘नकारात्मकता और विकास के प्रति ‘विरोध-भाव’ का आरोप लगाकर की। उन्होंने मुद्दों पर बहस करने की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की इस ललकार को…

कृषि-संकट मानवता का संकट है, वक़्त आ गया है कि देश भर के वंचित – अब संसद घेर लें!

भारत का कृषि संकट अब खेती-किसानी के पार जा चुका है। अब यह समाज का संकट बन चुका है। संभव है कि यह सभ्‍यता का संकट हो जहां इस धरती पर छोटे किसानों और खेतिहर मजदूरों का सबसे बड़ा समूह…

मोदी जी! पिछले एक साल से फसल बीमा का एक रुपया भी नहीं मिला किसानों को

जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की बिहार राज्य इकाई ने मोदी सरकार द्वारा बहुप्रचारित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कच्चा-चिट्ठा खोलते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है. 2016 में किसानों को लाभ पहुँचाने के नाम बनाई गई इस योजना…

अर्जेण्टीना में गम्भीर आर्थिक संकट

8 जून को अर्जेण्टीना की सरकार का अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के साथ एक बेहद जनविरोधी समझौता हुआ। इस समझौते के तहत मुद्रा कोष अर्जेण्टीना को 500 करोड़ अमेरिकी डॉलर का क़र्ज़ देगा। अर्जेण्टीना की मॉरिसियो माकरी सरकार लगातार मुद्रा…

संपादकीय एक : एनआरसी के असल मायने

वो लोग जो राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की हिमायत कर रहे थे, अब इसका मसौदा पक्का होने और इससे स्वीकार कर लिए जाने के बाद उन लोगों को लग रहा होगा कि इससे “बाहरी लोगों के खतरे” से थोड़ा राहत…

संपादकीय दो : भूख से होने वाली मौतों के लिए जिम्मेदार कौन?

नई दिल्ली में भूख से तीन बच्चियों के मर जाने की विचलित करने वाली खबर कई सारे सवाल खड़े करती है। सवाल न सिर्फ आजादी के 70 साल बाद भी अपने नागरिकों को भूख से सुरक्षित कर पाने में सरकार…

जीडीपी बढ़ रही है तो मज़दूरी क्यों नहीं बढ़ रही?

क्या भारत में मज़दूरों-मेहनतक़शों की मज़दूरी बढ़ रही है? यह सवाल आज के दौर में एक अहम सवाल बना हुआ है। खासकर तब जबकि सरकारें देश की तमाम तरक्क़ी और विकास को जीडीपी के तराजू में तोल रही हैं। आज…

घरेलू नौकरानियों को मिला ट्रेड यूनियन का अधिकार

पश्चिम बंगाल में घरेलू नौकरानियों या महरियों को पहली बार ट्रेड यूनियन का अधिकार मिला है. यह लोग पश्चिमबंगाल गृह परिचारिका समिति (पीजीपीएस) के बैनर तले लंबे अरसे से इसके लिए आंदोलन कर रही थीं. 38 साल की तापसी मोइरा…

स्विस बैंकों में 50% बढ़ा भारतीयों का धन! नोटबंदी के समर्थक अर्थशास्त्रियों ने भी खड़े किए हाथ!

स्विस नेशनल बैंक की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों को मुताबिक 2017 के दौरान बैंक में जमा होने वाले भारतीयों के पैसों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। काले धन के खिलाफ अभियान के बावजूद स्विस…

पीएम मोदी के विदेशी दौरों पर चार साल में ख़र्च हुए 3.5 अरब से ज़्यादा

बेरोज़गारी और भुखमरी के मामले में भारत के नाम जिस दौर में नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, उसी समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक रिकॉर्ड बना रहे हैं। वाक़ई किसी ग़रीब देश में ऐसा अमीर प्रधानमंत्री शायद ही…

अंबानी ने ‘गैस-वार’ में भारत को हरा दिया! जनता भरेगी 50 करोड़ जुर्माना!

अंतराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में रिलायंस द्वारा डाली गयी 30 हजार करोड़ की डकैती का मुकदमा, ‘हम’ हार गए हैं। हम यानी भारत के लोग। दरअसल वहाँ पर मोदी सरकार की नहीं भारत की जनता की हार हुई है और एक पूंजीपति…

मोदी सरकार का पवनहंस घोटाला

कोई अखबार, कोई न्यूज़ चैनल आपको इस ‘घोटाले’ के बारे में नहीं बताएगा। आपने ‘पवनहंस’ हेलीकॉप्टर का नाम सुना होगा। जिस तरह से भारत में सार्वजनिक क्षेत्र में एयर इंडिया हवाई जहाज का संचालन करती थी उसी प्रकार सार्वजनिक क्षेत्र…

LIC कर्मचारी यूनियन ने IDBI बैंक के शेयर खरीदने पर खड़े किए गंभीर सवाल

केंद्र सरकार ने जिस तरह से सरकारी उपक्रम आईडीबीआई बैंक को लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन को बेचने का फैसला लिया है, उसका तमाम बैंक और इंश्योरेंस सेक्टर के लोग विरोध कर रहे हैं. सरकार के फैसले पर इन लोगों ने सवाल…

डाइकिन में पांच साल के संघर्ष के बाद यूनियन बहाल

नीमराणा (राजस्थान)। लंबे संघर्ष के बाद 29 अगस्त को डाइकिन एरकंडिशनिंग कंपनी में यूनियन पंजीकृत हो गई। इस खबर से जहाँ मज़दूरों में उत्साह का माहौल है, वहीं प्रबंधन दमन की कार्यवाहियां बढ़ाने लगा। श्रमिकों का ट्रांसफर आदि होने लगा।…

दिल्‍ली में न्‍यूनतम वेतन वृद्धि का फैसला कोर्ट से रद्द

दिल्ली हाइकोर्ट ने श्रमिकों का न्यूनतम वेतन बढ़ाने के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि ‘जल्दी प्रयास और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन के कारण दुर्भाग्यवश इस संशोधन को रोकना पड़ा’ क्योंकि इससे संविधान का उल्लंघन हो रहा…

पुस्‍तक अंश – काले धन पर प्रो. अरुण कुमार की शीघ्र प्रकाशित पुस्‍तक की भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर 2016 को अचानक 500 और 1000 रुपये के नोट अमान्य कर दिए जाने की घोषणा ने लाखों भारतीयों को, खासकर सबसे गरीब लोगों को अनावश्यक संकट में डाल दिया. सैकड़ों हजारों दिहाड़ी मजदूर,  दुकानदार…

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