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भारतीय लोकतंत्र और मुसलमानों का प्रतिनिधित्व: कुछ प्रासंगिक सवाल

हमारा देश एक ऐसे दौर से गुज़र रहा है, जहा नफ़रत, साम्प्रदायिकता और हिंसा आम बात हो गई। इस बहुसंख्यकवादी दौर में मुसलमान होना, मुसलमान जैसा दिखना, अपराध सा बना दिया गया है। कब्रिस्तानों से लेकर इबादतगाहों पर कब्ज़ा, शिक्षा…

नागरिकता विधेयक के ज्‍वालामुखी पर बैठे पूर्वोत्‍तर के परिदृश्‍य पर एक नज़र

सत्रहवें लोकसभा चुनाव के साथ ही भारत के चार राज्यों ओडिशा, आंध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश और सिक्किम की विधानसभा के भी चुनाव हो रहे हैं। आंध्र में लोकसभा की सभी 25 और विधानसभा की सभी 175 सीटों पर एक ही…

बेगुसराय बनाम आरा: बिहार के मैदान में दो कम्‍युनिस्‍ट चेहरे   

चुनावी राजनीति के इतिहास में जब भी बिहार के बेगूसराय का जिक्र होता है, तो उसे अक्सर कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (सीपीआइ) का गढ़ बता दिया जाता है। गढ़ पुराने ज़माने के राजा–महाराजाओं के सुरक्षित निवास स्थान के लिए प्रयोग में लाया…

मालेगांव, हेमंत करकरे और कुछ ज़रूरी सवाल : एक पुनरावलोकन

12 मई 2016 को यह खबर अखबारों की सुर्खियां बनी कि 2008 के मालेगांव बम धमाकों के मामले में नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) ने तय किया है कि वह मुंबई की अदालत में जो चार्ज शीट दाखिल करने जा रही…

योगी, राणा और पश्चिमी यूपी में संघ की समानांतर सरकार

रोड किनारे खड़ा नौजवान अपना हाथ मेरठ की वेस्‍टर्न कचहरी रोड पर स्थित त्‍यागी हॉस्‍टल की तरफ फैलाकर ऐसे भूमिका बांध रहा था जैसे इसके गौरवमयी इतिहास पर पुस्तक लिखने के बाद किसी पत्रिका को इंटरव्यू देने आया हो। उसके…

क्‍या हम भारत को और बीमार बनाने के लिए सरकारें चुनते हैं?

एक फरवरी 2018 को जब लोकसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य बीमा योजना की घोषणा की तब लोगों को सुनने में यह मोदी की ‘मास्टर स्ट्रोक’ योजना लगी। आयुष्मान भारत की नाम की इस बीमा योजना…

जगदलपुर: 12 साल में 157 मुकदमे झेल कर रिहा हुई निर्मलक्‍का, एक भी केस में सबूत नहीं मिला

जगदलपुर: 157 मामले दर्ज, 12 साल जेल में बिताए, एक भी मामले में सबूत नही मिला, अब हुई निर्दोष साबित। जगदलपुर केंद्रीय जेल में 12 साल से कैद निर्मलक्का की आखिरकार रिहाई हो गई। सुबह 11 बजे निर्मलक्का जेल से…

संपादकीय एक : नैतिक सत्य और न्यायिक सत्यनिष्ठा

हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई यौन उत्पीड़न के आरोपों की वजह से विवादों में घिर गए। उन पर यह आरोप उच्चतम न्यायालय की ही एक पूर्व कर्मचारी ने लगाए हैं। इस विवाद से लोक संस्थाओं और…

आरएसएस का आंबेडकर प्रेम : आंख में धूल झोंकने की कोशिश

डॉ. भीमराव आंबेडकर की भारतीय समाज में पहचान मुख्यत: एक समाज सुधारक, सामाजिक न्याय के प्रणेता, रक्षक  और  संविधानविज्ञ के रूप में प्रतिष्ठित है। 2014 से पहले डॉ. आंबेडकर  की पहचान भारतीय समाज में कुछ वर्गों द्वारा मुख्य रूप से…

जुलियन असांज की गिरफ्तारी: यह ‘’लोकतंत्र जैसा आभास देने वाला फासीवाद’’ है!

आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका थी– जुलियन असांज को इक्‍वेडर के दूतावास से घसीट कर बाहर लाया गया और गिरफ्तार कर लिया गया। इसमें कोई अचरज नहीं होना चाहिए: लंबे समय से इस बात के संकेत मिल रहे थे। हफ्ते…

देश का सबसे बड़ा फेक न्‍यूज़ नेटवर्क अमित शाह चलाते हैं: हफपोस्‍ट

Association of Billion Minds, ABM, यह वो संगठन और नेटवर्क है जो बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह की पर्सनल टीम की तरह काम करता है। बीजेपी अपने आप में एक विशाल संगठन है। निष्ठावान कार्यकार्ताओं की फौज है। इसके बाद…

फासीवाद-विरोधी समूह ने जारी किया जनता के महागठबंधन का घोषणापत्र

हम भारत के लोगों ने संविधान की रक्षा और सत्तारूढ़ फ़ासीवादियों द्वारा बहुजनों के प्रति किये गए अपराधों के लिए न्याय दिलाने हेतु जनता का महागठबंधन बनाने का संकल्प लिया है। इसका पहला क़दम होगा आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में…

इलाहाबाद में साझा भारत सम्‍मेलन: राष्‍ट्रीय आंदोलन के मूल्‍यों को दोबारा जगाने की अपील

प्रयागराज बना दिए गए इलाहाबाद में अप्रैल का दूसरा सप्ताह इस शहर की पुरानी और समृद्ध परम्परा के फिर से उठ खड़े होने का गवाह रहा। सेंट जोसेफ कॉलेज के होगन हॉल में आयोजित साझा भारत सम्‍मेलन में मंच की…

भाषण में परमाणु हथियारों का जिक्र करने पर IDPD ने उठायी मोदी के चुनाव लड़ने पर रोक की मांग

परमाणु हथियारों की रोकथाम के लिए काम करने वाले अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सकों के एक समूह की भारतीय इकाई इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (IDPD) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की है।…

लोकसभा चुनाव में लेखक संगठन प्रलेस, जलेस, जसम और दलेस की मतदाताओं से संयुक्‍त अपील

एक बार फिर आम चुनाव सामने हैं। ठीक पांच साल पहले जिन हाथों में केंद्र की सत्ता सौंपी गयी थी, उनकी जनविरोधी कारगुज़ारियाँ भी हमारे सामने हैं। ये पांच साल इस देश के इतिहास में एक दु:स्वप्न की तरह याद…

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