skip to Main Content

संपादकीय

नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में भारतीय जनता पार्टी का मई 2014 में देश की सत्‍ता में आना एक लिहाज से वाकई बहुत सकारात्‍मक रहा है। इसे ऐसे समझें कि इस सरकार ने बीते चार साल के अपने कार्यकाल में आर्थिक…

बैंक घोटाले, मोदी सरकार और पूँजीवाद

बैंक मानव उपभोग लायक कुछ भी उत्पादित नहीं करते। पहले उनका मुख्य काम सिर्फ़ व्यापारिक गतिविधियों की विभिन्न पार्टियों के बीच तय शर्तों और वक़्त पर सही भुगतान सुनिश्चित करना और इसका सही हिसाब रखना था। साथ ही जिनके पास…

बजट में गांव कहां है?

2018-19 के वित्तीय बजट के माध्यम से मोदी जी ने वादा किया है कि यह बजट ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित है। मोदी जी की सरकार को 26 मई 2018 को चौथा साल पूरा हो जायेगा। संसद से सड़क…

बजट में ‘मोदी केयर’ का मतलब एक व्यक्ति पर केवल 40 रुपये का सरकारी खर्च?

बजट 2018 की घोषणा करते हुये वित्तमंत्री ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का एलान किया। वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा कि इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ गरीब और वंचित परिवारों के लिए ये योजना…

आम बजट में ‘स्वास्थ्य बीमा’ कहीं निजी बीमा कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने का जुमला तो नहीं?

देश के आम बजट 2018 में “50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा”को जिस प्रकार मीडिया बेहतरीन स्वास्थ्य बजट बताकर पेश कर रहा है, उससे खुश लोगों को मेरी यह रिपोर्ट थोड़ा निराश कर सकती है। अभी वित्त मंत्री ने अपने…

मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में श्रम कानूनों की स्थिति

मोदी सरकार के कार्यकाल का चौथा वर्ष आते-आते इसकी नीतियों और हरकतों से जनता का असन्तोष बहुत बड़े पैमाने पर फैल चुका है। मोदी और भाजपा के ‘’भक्तों” में से भी बहुतों का अलग-अलग कारणों से इससे मोहभंग तेज़ी से…

श्रम और पलायन

उस समय में जब उत्पादन का मुख्य साधन कृषि हुआ करता था तब गंगा के मैदानी भाग में जीवनपयोगी वस्तुओं का उत्पादन सरल था, निश्चित ही जीवन भी सहज ही था और इन परिस्थितियों में घनी आबादी होना भी लाज़मी…

जीडीपी की बाज़ीगरी और आंकड़ों की गुलाटी सरकार बहादुर को बहुत भारी पड़ सकती है

तीन साल पहले मोदी सरकार ने जब जीडीपी तय करने के मानदंड बदले थे और ग्रोथ रेट अचानक सात फ़ीसदी के आसपास पहुँच गई थी, तब मॉर्गन स्टेनली इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट के चीफ़ ग्लोबल स्ट्रेटेजिस्ट रुचिर शर्मा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया…

बम्पर उत्पादन के बावजूद विदेश से गेहूं का आयात किसानों के लिए लेकर आया है तबाही!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आय दोगुनी करने, उनके फसल लागत का पचास प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी दावों के बीच, इस खबर को कतई सामान्य नहीं कहा…

खेती का संकट और स्वामीनाथन की रिपोर्ट

खेती-किसानी का संकट आजकल आम चर्चा का विषय है। मजदूर वर्ग की बेहद खराब हालत पर पूरी तरह से चुप्पी साधने वाला पूंजीवादी प्रचारतंत्र भी इस संकट की कभी-कभी चर्चा किया करता है। सत्ताधारी पूंजीवादी पार्टियों की इस पर चुप…

असहयोगात्मक संघीय ढांचा

इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली का हिंदी प्रोजेक्‍ट संपादकीय एक  वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है। संसाधनों के बंटवारे के मामले में यह केंद्र और राज्यों के बीच एक मध्यस्थ है। आयोग का मूल काम केंद्र सरकार की करों का केंद्र…

सरकारी विश्वविद्यालयों का जीवन-मरण

इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली का हिंदी प्रोजेक्‍ट संपादकीय दो  मध्यकालीन दौर के इतिहासकार मिनहाज-ए-सिराज ने लिखा है कि 12वीं सदी के अंत तक पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों पर कब्जा जमाने वाले बख्तियार खिलजी ने बिहार के किले पर हमला…

मोदी का ‘भूख शतक’! तीन साल में ‘हंगर इंडेक्स’ में भारत 55 से 100 पर!

हम सब मंदी की बात कर रहे हैं जबकि वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 2014 में 55वें स्थान से 100वें स्थान पर आ चुका है। तीन साल में 45 स्थान नीचे– इतना तेज विकास मोदी के अलावा कौन कर सकता…

सत्‍तर साल में पहली बार: बैंक बोर्ड से बेदख़ल हुए कर्मचारी और अधिकारी!

‘दि हिंदू’ अख़बार में एक ख़बर आई थी कि वर्तमान में किसी पब्लिक सेक्टर बैंक के बोर्ड में कर्मचारियों और अधिकारियों का कोई प्रतिनिधित्व अब नहीं रहा। आधुनिक प्रबंध शास्त्र में पार्टिसिपेटरी मैनेजमेंट (सहभागिता आधारित प्रबंध) को एक महत्वपूर्ण स्थान…

ऐतिहासिक ऊंचाई पर तेल के दाम

पेट्रोल डीजल की क़ीमतें अपने उच्चतम स्तर को छू रही हैं। केंद्र सरकार उस पर कर लगा कर अपना खजाना बढ़ा रही है। तर्क यह दिया जाता है कि शिक्षा स्वास्थ्य ओर अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च इसी रकम से…

लोन के ‘राइट ऑफ’ के नाम पर ये क्‍या चल रहा है?

वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने यह जानकारी सदन में दी कि देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्तवर्ष 2014-15 से सितंबर 2017 तक 2.47 लाख करोड़ का एनपीए लोन राइट ऑफ कर दिया है। ये किसका पैसा…

राजस्थान: पांच सौ रुपये की दिहाड़ी दिलाने का झांसा देकर ग्रामीणों पर किया ड्रग ट्रायल

राजस्थान की राजधानी जयपुर के मालपाणी अस्पताल से ड्रग ट्रायल का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां कुछ गरीब युवकों को काम का झांसा देकर उन पर विदेशी दवाओं का अवैध तरीके से परीक्षण किया गया है। दैनिक भास्कर के…

नोटबंदी के बाद बैंकों को मिले सबसे ज़्यादा जाली नोट, संदिग्ध लेन-देन के मामले भी बढ़े : रिपोर्ट

नोटबंदी के बाद देश के बैंकों को सबसे अधिक मात्रा में जाली नोट मिले, वहीं इस दौरान संदिग्ध लेन-देन में भी 480 प्रतिशत से भी अधिक का इज़ाफ़ा हुआ। 2016 में नोटबंदी के बाद संदिग्ध जमाओं पर आई पहली रिपोर्ट…

एयर इंडिया को हुए नुकसान के लिए किसे जवाबदेह ठहराया जाए: लोक लेखा समिति

लोक लेखा समिति (पीएसी) के कुछ सदस्यों ने एयर इंडिया के विनिवेश पर सवाल उठाए और जानना चाहा कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस एयरलाइंस को हुए भारी नुकसान के लिए किसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। पीएसी की एक बैठक…

पहचान की चोरी है आधार का खतरा: रॉबर्ट बैपटिस्‍ट से बातचीत

एक फ्रांसीसी मोबाइल ऐप डेवलप करने वाले एक व्यक्ति ने ट्विटर के जरिये आधार तंत्र के  सुरक्षा मुद्दों को उठाया है। हाल में इस खाते से आधार ऐप्केशन में सेंध लगाने का एक वीडियो जारी हुआ। इस ट्विटर खाते को…

Back To Top