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मुस्लिम आबादी वृद्धि और सेक्युलर डिस्कोर्स का हिंदुत्ववादी डर

मुसलमानों की बढ़ती हुई आबादी पर होने वाली बहसों में मुख्यतः दो स्वर होते हैं। पहला, जो कि हिंदुत्ववादी जेहनियत से संचालित होता है, वह भारत में मुसलमानों की बढ़ती हुई आबादी को देश की सुरक्षा पर मंडराते खतरे के…

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जनादेश 6 / केवल पंद्रह साल में अर्श से फ़र्श पर पहुंच गई कम्‍युनिस्‍टों की चुनावी राजनीति

भारत की तीनों प्रमुख संसदीय कम्युनिस्ट पार्टियों की 2019 के आम चुनाव में जबरदस्‍त हार हुई है। उन्होंने केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु समेत विभिन्न राज्यों में एक सौ से अधिक प्रत्याशी खड़े किये थे। सिर्फ पांच जीत सके। इनमें से…

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जनादेश 5 / आम चुनाव के नतीजों से जुड़े उन पांच सवालों का जवाब, जो सबके मन में हैं

17वीं लोकसभा का चुनाव संपन्न हो गया। अंदेशा पहले से था कि 2014 के मुकाबले 2019 के नतीजे ज्यादा अप्रत्याशित और चौंकाने वाले होंगे। नतीजे आने के बाद चौंकने वालों में वे लोग शामिल नहीं हैं जो संघ परिवार से…

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जनादेश 4 / पश्चिम बंगाल में आरएसएस-बीजेपी ने हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कैसे किया

लोकसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और मोदी सरकार भारी बहुमत के साथ फिर से सत्तासीन होने जा रही है। यूँ तो तमाम एक्जिट पोल में इसकी आहट पहले ही मिल चुकी थी पर वोटिंग मशीनों की गिनती जैसे-जैसे…

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जनादेश 3 / बिहार में महागठबंधन का सफाया क्‍यों और कैसे हुआ?

मोदी की सुनामी में पूरे देश के साथ बिहार में भी विपक्ष ध्वस्त हो गया। यहां एनडीए को 39 सीटों पर जीत मिली तो महागठबंधन को किशनगंज की केवल एक सीट मिली। कांग्रेस का खाता जरूर खुला लेकिन मुख्य विपक्षी…

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जनादेश 2 / पूर्वांचल: बसपा का वोटबैंक मानी जाने वाली शबरी की संतानें श्रीराम के पास कैसे चली गईं?

आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की चौंकाने वाली शानदार जीत में उत्‍तर प्रदेश के वनवासी मुसहरों का बड़ा योगदान है। जौनपुर-वाराणसी की मछलीशहर लोकसभा सीट हो या सोनभद्र-चंदौली की राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट, इस पूरे इलाके में करीब एक लाख…

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जनादेश 1 / मोदी को मिला जनादेश महज धर्मांधता से नहीं तौला जा सकता

हम में से कई को ऐसा महसूस हो रहा है गोया इन चुनाव नतीजों के साथ यह देश अपने तमाम लोगों सहित किसी अंधेरी और भयावह सुरंग में से गुज़र रहा हो। 2014 की गर्मियों में भी कुछ ऐसे ही…

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संस्‍कृति की ज़मीन, बदलाव के बीज

मार्क ट्वेन ने कभी कहा था – धूम्रपान की आदत छोड़ने में मैं ख़ासा माहिर हूँ; यह काम मैंने हज़ारों बार किया है।सन्धान की यह केवल तीसरी शुरुआत है। वह भी काग़ज़ पर छप कर नहीं। अभी केवल वेब-पेज़ के…

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विकलांग राजनीति

चुनाव के समय हर चीज का महत्व बढ़ जाता है। मेरी टांग की भी कीमत बढ़ी। मुझे यह मुगालता है कि मेरी टांग में फ्रेक्चर हो गया था। यह खबर सारे विश्व में फ़ैल चुकी है। मुझे यह सुखद भ्रम…

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पंकज चतुर्वेदी की दस सामयिक कविताएं

1 जिस दिन नेता कहते हैं -------------------------------------------------------- जिस दिन नेता कहते हैं : कमज़ोरों का उत्थान होगा उसके बाद ही कहीं कोई कमज़ोर पिटता है उसे ज़लील करते हुए कहा जाता है : अब यह नया राष्ट्र बन गया है…

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